मुंबई: अदालत ने फर्जी पहचान के साथ भारत में रहने के आरोप में अफगान नागरिक को दोषी ठहराया

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    मुंबई
    मुंबई की अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने एक अफगान नागरिक को गलत पहचान के साथ भारत में रहने का दोषी ठहराया है। अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के तामेर जुरमत जिले के मूल निवासी हबीबुल्लाह प्रांग उर्फ जहीर अली खान (38) को 2007 से मुंबई के वडाला में रहने के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग करने का दोषी पाया गया है। अदालत ने प्रांग को 11 महीने कैद की सजा सुनाई और 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने उसे अफगानिस्तान निर्वासित करने का भी आदेश दिया।

    मुंबई की क्राइम ब्रांच यूनिट-5 ने प्रांग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी नागरिक आदेश और विदेशी नागरिक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपी पर जालसाजी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और विदेशी पंजीकरण नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।

    मुंबई की क्राइम ब्रांच यूनिट-5 ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की और पाया कि आरोपी 2007 से मुंबई के वडाला में जाली दस्तावेजों का उपयोग करके जहीर अली खान नाम से रह रहा था। उसने इस फर्जी पहचान के तहत पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रखा था।

    यूनिट इंचार्ज पुलिस इंस्पेक्टर घनश्याम नायर, जांच अधिकारी सदानंद येरेकर, कोर्ट ऑफिसर पीएसआई विजय बेंडाले और पुलिस कांस्टेबल रावसाहेब फंडे ने आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

     

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