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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक हॉस्टल में 9 फरवरी के दिन खाने के मेन्यू को लेकर एक बड़ा विवाद

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अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक हॉस्टल में 9 फरवरी के दिन खाने के मेन्यू को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, सुलेमान हॉल के एक नोटिस में यह कहा गया था कि रविवार के खाने में चिकन बिरयानी की जगह बीफ बिरयानी परोसी जाएगी। इस निर्णय को लेकर छात्रों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, लेकिन कुछ हिंदूवादी नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे हिंदू आस्थाओं के खिलाफ बताया।

नोटिस में लिखा था, “इस रविवार यानी 9 फरवरी के दिन लोकप्रिय मांग के आधार पर चिकन बिरयानी की जगह बीफ बिरयानी परोसी जाएगी। यह बदलाव कई बार की मांगों के बाद किया जा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि आप हमारे मेन्यू में इस नए बदलाव का आनंद लेंगे।” इस नोटिस में सीनियर फूड डाइनिंग हॉल के मोहम्मद फ़ैयाज़ुल्लाह और मुजस्सिम अहमद भाटी के नाम भी थे और तारीख 9 फरवरी का उल्लेख किया गया था। यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हलचल मच गई। कुछ लोग इसे एक सामान्य बदलाव मान रहे थे, जबकि कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम बताया।
 
हिंदू नेताओं का विरोध
बीफ बिरयानी के मेन्यू में शामिल किए जाने को लेकर हिंदू नेताओं ने जमकर विरोध किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के महानगर मंत्री हर्षद हिंदू ने इस कदम को शांति और सद्भावना के लिए खतरे का संकेत बताया। उनका कहना था, "यह कदम हिंदू आस्थाओं के खिलाफ है और यह धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करता है।" उन्होंने विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने की मांग की और यह भी कहा कि इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की जाए।

प्रॉक्टर की सफाई
इस विवाद के बाद, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर वसीम अहमद ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यह एक टाइपिंग मिस्टेक थी। उनका कहना था कि सुलेमान हॉल के मेन्यू में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रॉक्टर ने यह भी कहा कि नोटिस में लिखा गया बदलाव गलती से प्रकाशित हुआ था और खाने के मेन्यू में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। अब, जैसे पहले खाना परोसा जाता था, वही उसी प्रकार से परोसा जाएगा।

क्या था वजह?
इस पूरे विवाद का एक कारण हो सकता है छात्र समुदाय में अलग-अलग खाद्य प्राथमिकताएँ और धार्मिक भावनाएँ। AMU जैसी यूनिवर्सिटी में जहां विविधता का समावेश है, वहां छात्रों की सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनाएँ बहुत महत्वपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, प्रॉक्टर की सफाई के बाद स्थिति को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन इस विवाद ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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