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घोटाले की साजिश में फंसे रिटायर्ड IAS निरंजन दास, पूर्व आबकारी आयुक्त को किया गया गिरफ्तार

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 रायपुर
3,200 करोड़ के शराब घोटाले में लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर रहे रिटायर्ड आइएएस अधिकारी निरंजन दास को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया।
निरंजन दास पर यह है आरोप

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी आयुक्त रहे निरंजन दास पर शराब घोटाले की पूरी रूपरेखा बनाने और उसे लागू कराने का आरोप है। विभाग प्रमुख के तौर पर उन्होंने विभाग में सक्रिय सिंडीकेट का सहयोग करते हुए, शासकीय शराब दुकानों में अन एकाउंटेंड शराब की बिक्री, अधिकारियों के ट्रांसफर, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, दोषपूर्ण शराब नीति लाये जाने में सहयोग, अन्य तरीकों से सिंडीकेट को लाभ पहुंचाते हुए उसके एवज में करोड़ों का लाभ अर्जित किया था।

दास को शुक्रवार कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने नौ मई तक गिरफ्तारी से राहत दी थी। सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू के अधिकारी नितेश पुरोहित, यश पुरोहित को गिरफ्तार करने गिरिराज होटल गई थी,जहां से दोनों फरार हो गए।

कस्टम मिलिंग घोटाले में ईडी की छापेमारी

वहीं 140 करोड़ के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भिलाई समेत प्रदेश के दस ठिकानों में छापेमारी की। गुरुवार की सुबह छह बजे ईडी की चार सदस्यीय टीम ने भिलाई के तालपुरी इलाके में रिटायर्ड आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला और हुड़को में सुधाकर राव घर दबिश दी। टीम ने घर की घेराबंदी कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों,लेनदेन से जुड़े कागजों को खंगालकर छानबीन की।

छापेमारी के दौरान आलोक शुक्ला घर पर नहीं थे। उनके मप्र जाने की जानकारी दी गई थी। ईडी ने घर पर नोटिस चस्पा कर उन्हें तलब किया है। बताया जा रहा है कि आलोक शुक्ला सरेंडर करने ईडी की विशेष कोर्ट पहुंचे थे,लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं होने पर उन्हें वापस भेज दिया गया।

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