Home देश अमेरिका ने पहले आंख दिखाई, अब भारत से रूसी तेल खरीदने की...

अमेरिका ने पहले आंख दिखाई, अब भारत से रूसी तेल खरीदने की भीख मांग रहा; ईरान का तीखा तंज

0

नई दिल्ली

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को रूसी तेल पर अमेरिकी रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब भारत सहित दुनिया भर के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है, जबकि पहले अमेरिका ने ही इस तरह के आयात को रोकने के लिए कई देशों पर भारी दबाव डाला था।

'एक्स' पर अमेरिका को घेरा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए अराघची ने लिखा- अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाने में महीनों लगा दिए। लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्ध के बाद, अब वाइट हाउस भारत सहित पूरी दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है।

यूरोपीय देशों की भी की कड़ी आलोचना
ईरानी विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने के लिए यूरोपीय देशों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय देशों को लगा था कि इसके बदले में उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिलेगा। अराघची ने तंज कसते हुए कहा- यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन मिल जाएगा। यह बहुत ही दयनीय है।

भारत के जहाजों को ईरान ने दी सुरक्षित निकासी
एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष जारी है, वहीं इस बीच ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय झंडे वाले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) वाहक जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है।

लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने यह भी बताया कि सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले एक कच्चे तेल के टैंकर के शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज 1 मार्च के आसपास हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरा था।
'भारत हमारा मित्र है, हमारी नियति एक है'

इससे पहले, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। उन्होंने इसके पीछे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और साझा हितों का हवाला दिया था।

जब फथली से पूछा गया कि क्या वैश्विक ऊर्जा व्यापार के इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग से ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने देगा, तो उन्होंने जवाब दिया: हां। क्योंकि भारत और हम दोस्त हैं। हम मानते हैं कि ईरान और भारत मित्र हैं। हमारे समान हित हैं; हमारी एक साझा नियति है।

उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी संबंधों पर जोर देते हुए आगे कहा- भारत के लोगों की पीड़ा हमारी पीड़ा है और इसके विपरीत हमारी पीड़ा उनकी है। इसी कारण से भारत सरकार हमारी मदद करती है, और हमें भी भारत सरकार की मदद करनी चाहिए क्योंकि हमारा भाग्य और हित एक समान हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here