जगरगुंडा में टूटी दहशत की दीवार, नक्सलमुक्त होते ही खाकी की वापसी से लौटी रौनक

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    सुकमा.

    कभी शाम होते ही बंद हो जाने वाला जगरगुंडा अब रात में भी जाग रहा है। दो दशकों तक भय के साए में जीने वाला इलाका अब बदलता नजर आ रहा है। सड़कों के निर्माण से बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से संपर्क आसान हुआ है। बाजारों में फिर से चहल-पहल लौटने लगी है।

    कभी इमली मंडी के लिए मशहूर क्षेत्र फिर व्यापार की राह पकड़ रहा है। महुआ, इमली और चिरौंजी का कारोबार दोबारा गति पकड़ रहा है। जनवरी 2026 में वर्षों बाद बैंक शाखा खुलना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। अब लोग पैसे निकालने दूर-दराज नहीं जा रहे। रात में भी लोगों का बेखौफ बाहर निकलना बदलाव का संकेत है। हालांकि नेटवर्क और अधूरी सड़कें अब भी चुनौती बनी हुई हैं। जगरगुंडा अब खौफ नहीं, विकास की नई कहानी लिख रहा है।

    नक्सलमुक्त जिले में पुलिस लौटी खाकी पहचान में
    कोंडागांव को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद बड़ा बदलाव दिखा है। जिला पुलिस ने ड्यूटी में पारंपरिक खाकी वर्दी पहनने के निर्देश दिए हैं। पहले संवेदनशील इलाकों में कैमफ्लाज वर्दी का उपयोग किया जाता था। यह वर्दी ऑपरेशन और सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से जरूरी थी। अब फोकस कानून व्यवस्था और जनसेवा पर केंद्रित किया गया है। खाकी वर्दी से पुलिस आमजन के बीच अधिक सहज दिखेगी। जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। पहचानने योग्य पुलिसिंग से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है। सूचना या शिकायत पर नजदीकी थाने से संपर्क करने कहा गया है। यह बदलाव शांति और सामान्य हालात का प्रतीक माना जा रहा है। कोंडागांव अब सुरक्षा से विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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