
भोपाल
दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में एक्शन शुरू हो गया है। मंगलवार को बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए दतिया जिले का पूरा संगठन भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के बाद जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है।
दतिया उपचुनाव में हार के बाद भोपाल में समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। अब बीजेपी ने अनुशासनात्मक कार्यवाही की है। मंगलवार को जारी लेटर ने कहा गया है कि मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की सभी इकाइयों को भंग किया जाता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित विशेष समिति की अनुशंसाओं के आधार पर की गई है। पार्टी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दतिया में संगठनात्मक स्तर पर व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा।
कांग्रेस ने बरकरार रखी सीट
दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराया. यह सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी. 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जबकि 4 अगस्त को नतीजे घोषित किए गए. कांग्रेस ने यह सीट अपने पास बरकरार रखी।
बीजेपी के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
दतिया को लंबे समय से बीजेपी का मजबूत इलाका माना जाता रहा है. इस बार पार्टी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार में सीएम मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा दोनों ने हिस्सा लिया, लेकिन पार्टी जीत नहीं सकी. इसके बाद उम्मीदवार के चयन, स्थानीय रणनीति और संगठन की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
नतीजों में एक आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर-121 पर भी बीजेपी पीछे रह गई. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 264 वोट ही मिले. इसके बाद पार्टी के भीतर समीक्षा की मांग तेज हो गई. राजनीतिक गलियारों में भीतरघात और बूथ प्रबंधन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
दतिया में बीजेपी के पिछड़ने की मुख्य वजह
1- डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत हुई.
2- बीजेपी का ब्राह्मण कार्ड और जातीय समीकरण अपेक्षित असर नहीं दिखा सके.
3- कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम की मजबूत स्थानीय पकड़ और जनसंपर्क का फायदा मिला.
4- बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति और बूथ प्रबंधन अपेक्षा के अनुरूप प्रभावी नहीं रहा.
पूरे जिला संगठन को एक साथ भंग करना बताता है कि बीजेपी इस हार को सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं मान रही. पार्टी अब दतिया में नई टीम के साथ नई शुरुआत करना चाहती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नए संगठन में किन चेहरों को जगह मिलती है और पार्टी इस हार से क्या सीख लेती है।
सीएम आवास पर हुई थी बैठक
दतिया में हार के बाद बीजेपी एक्शन मोड में आ गई। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आवास पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, चुनाव प्रभारी, मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए थे।
दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी का एक्शन
दतिया जिले की कार्यकारिणी को भंग किया
समीक्षा बैठक के बाद पार्टी का फैसला
हेमंत खंडेलवाल ने सख्त कार्रवाई का दिया था इशारा
बीजेपी को मिली थी हार
दतिया विधानसभा उपचुनाव के रिजल्ट सोमवार को घोषित किए गए थे। उपचुनाव में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। यहां से कांग्रेस के घनश्याम सिंह को जीत मिली है। भाजपा को 6,016 वोटों से मिली हार के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि था कि पार्टी समीक्षा करेगी और अनुशासनहीनता की भूमिका मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
पवन तिवारी


