
जबलपुर
हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को वितरित होने वाली यूनिफार्म की आपूर्ति के लिए जारी करीब 350 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। पाठ्यपुस्तक निगम ने इस खरीदी के लिए खुला टेंडर निकाला था।3 संगठनों ने कोर्ट में दलील दी अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित 3 संगठनों ने कोर्ट में दलील दी कि पाठ्यपुस्तक निगम ने मप्न भंडार क्क्रय नियम-2023 का खुला उल्लंघन किया है।
इससे प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिलों से जुड़े 2 लाख बुनकर परिवारों की आजीविका पर खतरा मंडराने लगा है।उपक्रमों से सीधी खरीदी का नियम भंडार क्रय नियम 2023 के तहत राज्य उपक्रमों से सीधी खरीदी का नियम है। जिसमें हथकरघा बुनकरों, समितियों, महिला समूहों और स्थानीय सहकारी संस्थाओं से कपड़े व उससे बने उत्पादों की खरीदी अनिवार्य है।
राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल होने तक संबंधित टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी व तीर्थेश भारिल्ल ने पक्ष रखा, जबकि शासन की ओर से डा. एसएस चौहान उपस्थित हुए।
3 जून 2026 को जारी टेंडर प्रक्रिया को चुनौती
यह आदेश अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित तीन बुनकर संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा 3 जून 2026 को जारी टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इसे मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के प्रविधानों के विपरीत बताया है।
1993 से नोडल एजेंसी होने का दावा
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति को प्रदेश के सरकारी स्कूलों की यूनिफार्म आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करने की व्यवस्था रही है। उनका दावा है कि 2023 के भंडार क्रय नियमों के तहत राज्य उपक्रमों से स्कूल ड्रेस की खरीदी के लिए खुली निविदा की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद पाठ्यपुस्तक निगम ने 350 करोड़ रुपये का खुला टेंडर जारी कर दिया।
दो लाख बुनकर परिवार प्रभावित होने का दावा
याचिकाओं में कहा गया कि इस प्रक्रिया से प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योग से जुड़े करीब दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। बुनकर संगठनों का कहना है कि अनेक परिवारों ने उद्योग चलाने के लिए बैंकों से ऋण लिया है। टेंडर व्यवस्था लागू होने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
एक सप्ताह में जवाब, अगली सुनवाई में होगी आगे की सुनवाई
कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार एवं संबंधित पक्षों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए फिलहाल टेंडर को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने इन याचिकाओं को पूर्व से विचाराधीन याचिका के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।


