
भोपाल
ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह एवं मंत्री समूह के डेलीगेट्स ने रविवार को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण किया। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन सहित ब्रिक्स देशों से आए 15 से अधिक डेलीगेट्स ने हजारों वर्ष पुरानी मानव सभ्यता, प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासत को करीब से अनुभव किया। मध्यप्रदेश की प्रागैतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई।
गाइडेड हेरिटेज टूर के दौरान ब्रिक्स डेलीगेट्स ने विभिन्न शैलाश्रयों का भ्रमण किया और इन चित्रों के माध्यम से प्रागैतिहासिक मानव की जीवनशैली, उसकी सामाजिक गतिविधियों तथा प्रकृति एवं वन्यजीवों के साथ उसके संबंध को समझा। विशेष रूप से हाथी, गौर, हिरण, बंदर, जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के चित्रों ने प्राचीन मानव के जीवन और उसकी कलात्मक अभिव्यक्ति में प्राकृतिक दुनिया के महत्वपूर्ण स्थान को दर्शित किया।
भीमबेटका: शैलचित्र सुनाते हैं मानव और प्रकृति के रिश्ते की कहानी
भीमबेटका के रॉक शेल्टर्स में शैलचित्र केवल प्राचीन कला के उदाहरण नहीं हैं, बल्कि वे मानव और उसके प्राकृतिक परिवेश के बीच हजारों वर्ष पुराने संबंध की झलक भी प्रस्तुत करते हैं। यहां पाए जाने वाले चित्रों में वन्यजीव, मानव आकृतियां, शिकार के दृश्य, सामूहिक गतिविधियां तथा प्रकृति के साथ मानव के जुड़ाव को अभिव्यक्त किया गया है।
भीमबेटका में 750 से अधिक रॉक शेल्टर्स हैं, जिनमें 100 से अधिक शैलाश्रयों में चित्र पाए गए हैं। इन चित्रों में अलग-अलग कालखंडों की कलात्मक परंपराओं की निरंतरता दिखाई देती है। कुछ चित्रों में शिकार और सामुदायिक गतिविधियां दिखाई देती हैं, जबकि बाद के चित्रों में जुलूस, योद्धाओं और सामूहिक अनुष्ठानों जैसे दृश्य भी मिलते हैं। डेलीगेट्स के लिए यह अनुभव केवल पुरातात्विक स्थलों के भ्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कला के माध्यम से मानव सभ्यता की विकास यात्रा को समझने का अवसर बना। हजारों वर्ष पहले चट्टानों पर उकेरी गई ये आकृतियां आज भी उस समय के मानव की कल्पना, रचनात्मकता और अपने परिवेश के प्रति उसकी संवेदनशीलता से परिचित कराती हैं।


