
नई दिल्ली
बैंकिंग की दुनिया में अब मुकाबला सिर्फ कस्टमर्स को लोन देने और डिपॉजिट जुटाने तक सीमित नहीं है. बड़े बैंक अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नए-नए कारोबार में उतर रहे हैं और विदेशों में भी अपना दायरा बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में सरकारी क्षेत्र के इंडियन बैंक (Indian Bank) ने भी अपनी आगे की रणनीति तैयार कर ली है. बैंक कुछ नए क्षेत्रों में कदम रखने की तैयारी में है, वहीं विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस पूरी योजना में आने वाला करीब एक साल अहम हो सकता है।
दो नए कारोबार में उतरने की तैयारी
इंडियन बैंक अब लाइफ इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड बिजनेस में एंट्री की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैंक इन दोनों सेक्टर्स के लिए बोर्ड की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है. बैंक के एमडी और सीईओ बिनोद कुमार ने बताया कि यह योजना ट्रैक पर है. प्रस्तावित सब्सिडियरी या जॉइंट वेंचर के जरिए इन कारोबारों में उतरने की तैयारी है. बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद जरूरी रेगुलेटरी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी. कुमार के मुताबिक, इस तरह के कारोबार किसी संगठन के लिए कमाई बढ़ाने के साथ-साथ ब्रांड को मजबूत करने में भी मदद करते हैं।
अच्छे पार्टनर की तलाश सबसे अहम
बिनोद कुमार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, सही और अच्छा पार्टनर चुनना इस योजना का सबसे अहम हिस्सा होगा. उन्होंने कहा कि अगर पार्टनर अच्छा हो तो वेल्थ क्रिएशन यानी कमाई बढ़ाने की क्षमता भी तेज होती है. यही वजह है कि बैंक इस मामले में जल्दबाजी के बजाय सही साझेदार की तलाश पर जोर दे रहा है।
इंश्योरेंस कारोबार में पहले से मौजूदगी
इंडियन बैंक के लिए इंश्योरेंस कारोबार पूरी तरह नया नहीं है. बैंक पहले से जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में मौजूद है. इंडियन बैंक की यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 28.52 फीसदी हिस्सेदारी है. यह हिस्सेदारी साल 2020 में पुराने इलाहाबाद बैंक के इंडियन बैंक में विलय के बाद बैंक को मिली थी. यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस की स्थापना 2007 में हुई थी. यह एक जॉइंट वेंचर है. इसमें इंडियन बैंक की 28.52 फीसदी, इंडियन ओवरसीज बैंक की 18.06 फीसदी और कर्नाटक बैंक की 6 फीसदी हिस्सेदारी है. डाबर इन्वेस्टमेंट कॉर्प की हिस्सेदारी 12.81 फीसदी है, जबकि जापान की सोम्पो जापान इंश्योरेंस की 34.61 फीसदी बहुलांश हिस्सेदारी है।
विदेशों में भी मौजूदगी बढ़ाने पर काम
इंडियन बैंक की रणनीति सिर्फ नए कारोबार तक सीमित नहीं है. बैंक विदेशों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रहा है. फिलहाल बैंक के पास सिंगापुर में फुल-सर्विस इंटरनेशनल ब्रांच है. श्रीलंका में कोलंबो और जाफना में उसकी शाखाएं हैं. इसके अलावा गुजरात के गांधीनगर स्थित GIFT City में बैंक की IFSC Banking Unit भी काम कर रही है।
बैंक का दुबई में खुलेगा नया ऑफिस
विदेशी विस्तार में बैंक का अगला बड़ा फोकस दुबई है. बैंक वहां रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलना चाहता है. इसका मकसद वेस्ट एशिया में मौजूद बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कारोबारी अवसरों का फायदा उठाना है. बिनोद कुमार ने बताया कि GIFT City की शाखा से बैंक को अच्छा कारोबार मिल रहा है. इसमें कई सिंडिकेटेड लोन में बैंक की भागीदारी भी शामिल है. उन्होंने कहा कि दुबई में बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय (NRI) रहते हैं और वहां कामकाजी आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी है. दुबई में रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलने के लिए बैंक के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है. अब इसके लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों का इंतजार है।
मलेशिया और इंडोनेशिया पर भी नजर
दुबई के अलावा इंडियन बैंक मलेशिया और इंडोनेशिया में भी संभावनाएं तलाश रहा है. बैंक इन दोनों बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है. इससे साफ है कि बैंक की विदेश विस्तार रणनीति अब मौजूदा शाखाओं और इकाइयों तक सीमित नहीं रहने वाली है. बैंक नए बाजारों में कारोबार के अवसर तलाश रहा है।


