
समन्वित प्रयासों से स्थिति नियंत्रित, एएनसी कवरेज करें शत-प्रतिशत: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और रोग नियंत्रण की व्यापक कार्यवाही
बाल रोग बेड की संख्या 50 से बढ़ाकर 150 तथा PICU बेड की संख्या 10 से बढ़ाकर 21
मलेरिया नियंत्रण के लिए एक सलाहकार, चार मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर तथा 112 कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर किए गए तैनात
51 नवीन डॉक्टर्स ने किया जॉइन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की समीक्षा
भोपाल
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, खसरा-रूबेला, डायरिया एवं मलेरिया नियंत्रण तथा दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए की जा रही कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बालाघाट में महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आपसी समन्वय के साथ स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर निरंतर निगरानी, समय पर उपचार, टीकाकरण, पोषण, स्वच्छता और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी रहें।
बालाघाट को आदर्श जिले के रूप में विकसित किया जाए
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि गंभीरता, समर्पण और बेहतर समन्वय के साथ सेवा प्रदाय किया जाए तो बालाघाट की सभी पंचायतों को सुमन पंचायत बनाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्तमान प्रयासों को निरंतर बनाए रखते हुए बालाघाट को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श जिले के रूप में विकसित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बालाघाट जैसे जनजातीय एवं भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभागों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिलकर काम करें और मैदानी स्तर पर प्रत्येक गतिविधि की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट कलेक्टर कुमार सत्यम तथा जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
सुमन पंचायत के रूप में पंचायतों को विकसित करने के लिए एक वर्ष की अवधि में शून्य मातृ एवं शिशु मृत्यु सुनिश्चित करना प्रमुख मानकों में शामिल है। गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का चिन्हांकन एवं फॉलोअप, संस्थागत प्रसव, प्रसवोत्तर एवं नवजात देखभाल और समय पर रेफरल जैसी सेवाओं की प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना इसका लक्ष्य है। इन मानकों की सतत पूर्ति और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी के आधार पर पंचायतों को सुमन पंचायत के रूप में विकसित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एएनसी चेकअप का कवरेज 90 प्रतिशत तक पहुंचना महत्वपूर्ण प्रगति है। इसे शत-प्रतिशत तक ले जाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं का समय पर चिन्हांकन, नियमित फॉलोअप तथा आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान में समय से भर्ती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बर्थ वेटिंग होम की उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं है। अधिकारी एवं मैदानी अमला पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ कार्य करें। इसी गति से प्रयास जारी रहे तो बालाघाट की सभी पंचायतों को सुमन पंचायत के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बालाघाट में किए जा रहे कार्यों को प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित कर पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बनाने पर जोर दिया।
खसरा-रूबेला नियंत्रण के लिए विशेष निगरानी
बालाघाट में खसरा नियंत्रण के लिए बुखार एवं दाने वाले मामलों की विशेष निगरानी की जा रही है। ऐसे संदिग्ध मामलों में खसरा-रूबेला की जांच सुनिश्चित की जा रही है। नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान कर उन्हें MR वैक्सीन से सुरक्षित करने के लिए कैच-अप राउंड एवं आउटब्रेक रिस्पॉन्स इम्युनाइजेशन (ORI) गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अब तक लगभग 27 हजार बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि ORI के अंतर्गत 1 से 10 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 15 हजार बच्चों का टीकाकरण किया गया है। संदिग्ध रोगियों को आवश्यकता अनुसार विटामिन-A की खुराक दी जा रही है तथा फीवर-रैश सर्विलांस लगातार जारी है। दुर्गम एवं कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में दूरस्थ गांवों की मैपिंग कर प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण एवं विशेष सर्विलांस किया जा रहा है। वैक्सीन को दूरस्थ क्षेत्रों तक समय पर पहुंचाने के लिए अल्टरनेट वैक्सीन डिलीवरी (AVD) व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है।
डायरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान
जिले में दस्त एवं डायरिया नियंत्रण के लिए घर-घर स्तर पर ओआरएस एवं जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अब तक 1,63,902 परिवारों को ओआरएस तथा 1,60,431 परिवारों को जिंक उपलब्ध कराया गया है। गंभीर स्थिति वाले 734 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर सफल उपचार किया गया है। जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार की क्षमता बढ़ाते हुए बाल रोग बेड की संख्या 50 से बढ़ाकर 150 तथा PICU बेड की संख्या 10 से बढ़ाकर 21 की गई है। दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए मोबिलाइजेशन की व्यवस्था की गई है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए घर-घर स्क्रीनिंग
बालाघाट के प्लाज्मोडियम फ़ाल्सीपैरम एंडेमिक क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर बुखार की जांच के लिए 15 टीमें लगातार कार्यरत हैं। इन टीमों द्वारा प्रतिदिन औसतन 300 से अधिक जांच की जा रही हैं। 19 जुलाई 2026 से अब तक 26,865 व्यक्तियों की मलेरिया जांच की गई है, जिसमें 980 मलेरिया प्रकरण पाए गए। इनमें 895 प्लाज्मोडियम फ़ाल्सीपैरम तथा 85 प्लाज्मोडियम वाइवैक्स के प्रकरण शामिल हैं। सभी चिन्हित मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया गया है तथा उपचार पूर्ण कराया जा रहा है। मच्छर नियंत्रण के लिए 71 गांवों के 7,065 घरों में कीटनाशक छिड़काव किया गया है। इसके साथ ही 44 गांवों के 8,610 घरों में थर्मल फॉगिंग की गई है। अतिरिक्त मानव संसाधन के रूप में एक सलाहकार, चार मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर तथा 112 कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर तैनात किए गए हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
बिरसा एवं बैहर विकासखंडों में 6 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं। इन मोबाइल इकाइयों के माध्यम से बुखार स्क्रीनिंग, ओपीडी, एएनसी/पीएनसी सेवाएं, एनसीडी एवं टीबी स्क्रीनिंग, दवा वितरण और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग गतिविधियों का विस्तार लगभग 50 गांवों तक किया गया है तथा 10 से अधिक चिकित्सक एवं CHO मैदानी स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं। कुंडेकसा विद्यालय में अस्थायी अस्पताल एवं स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था भी की गई है। बिरसा एवं बैहर क्षेत्र में जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए 600 से अधिक जल स्रोतों को शुद्ध किया गया है। स्कूलों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा समुदाय स्तर पर स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के संबंध में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ी
जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 51 नए बॉन्ड डॉक्टर जॉइन कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त एएनएम, सीडीपीओ एवं सुपरवाइजर सहित आवश्यक मैदानी मानव संसाधन की तैनाती की गई है।
बालाघाट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान से स्वास्थ्य अधोसंरचना को मिलेगी मजबूती
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के द्वारा बालाघाट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत ₹332 करोड़ लागत के विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न विभागों द्वारा बालाघाट में सुविधाओं एवं अधोसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। योजना अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने का कार्य भी किया जाएगा। योजना के अंतर्गत 22 उप स्वास्थ्य केंद्रों/आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में मरम्मत एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। दुर्गम क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त मोबिलिटी सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विठती तथा सानमुद्दा को 30-बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन तथा घुम्मूर एवं पाथरी के दो उप स्वास्थ्य केंद्रों को 6-बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही 2 नई मोबाइल मेडिकल यूनिट स्वीकृत की गई हैं तथा 10 नवीन उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया है। दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक दवाओं एवं अन्य स्वास्थ्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रोत्साहन आधारित व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
महिला एवं बाल स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
कलेक्टर बालाघाट कुमार सत्यम ने महिला एवं बाल स्वास्थ्य से जुड़े किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं का एएनसी चेकअप बढ़कर 90 प्रतिशत हो गया है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान कर उनका नियमित फॉलोअप किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी कारणवश बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो उनके घरों तक हॉट कुक्ड मील पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और नियमित निगरानी पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


