Home मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वायरल गर्ल को सुने बिना जन्मतिथि बदलना गलत

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वायरल गर्ल को सुने बिना जन्मतिथि बदलना गलत

0

महेश्वर 

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए वायरल वीडियो से चर्चा में आई युवती को जन्मतिथि विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। इंदौर बेंच ने महेश्वर नगर पालिका के सीएमओ की ओर से जन्मतिथि बदलने का आदेश रद्द करते हुए मामले पर युवती को सुनवाई का अवसर देकर नए सिरे से फैसला करने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
महेश्वर की युवती मोनालिसा और उसके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नगर पालिका की ओर से उसके मूल जन्म प्रमाण पत्र में की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिका के मुताबिक युवती ने मार्च 2026 में केरलम के एक मंदिर में शादी की थी। इसके बाद उसके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और युवती के मूल जन्म प्रमाण पत्र को रद्द कर उसकी जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया शुरू की। युवती का दावा है कि उसके जन्म प्रमाण पत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। यही तारीख उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज होने की बात याचिका में कही गई।

CMO ने क्यों बदली जन्मतिथि?
मामले में युवती के पिता की ओर से जन्मतिथि में सुधार के लिए आवेदन दिया गया था। उनका कहना था कि महेश्वर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मातृत्व रजिस्टर में युवती की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है। उनके मुताबिक इस रिकॉर्ड से युवती की शादी के समय नाबालिग होने की बात सामने आती है।

यह भी दलील दी गई कि पहले जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र माता-पिता के कथित शपथ पत्र के आधार पर बना था और बाद में अस्पताल के रिकॉर्ड मिलने पर नियमों के तहत उसमें संशोधन किया गया। इसके बाद महेश्वर नगर पालिका के सीएमओ ने 31 मार्च 2026 को आदेश जारी कर पहले दर्ज जन्मतिथि को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस गजेंद्र सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि युवती को उसके पिता की ओर से जन्मतिथि में बदलाव के लिए दिए गए आवेदन की जानकारी नहीं दी गई और न ही उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन माना और सीएमओ द्वारा जारी आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि युवती के पिता के आवेदन पर कानून के अनुसार दोबारा फैसला किया जाए और इससे पहले युवती को प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव से पहले उसका पक्ष नहीं सुना गया
जन्म प्रमाण-पत्र में किए गए इस बदलाव को चुनौती देते हुए युवती और उसके पति ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें कहा कि वर्ष 2015 में जारी आधार कार्ड में युवती की जन्मतिथि एक जनवरी 2008 ही दर्ज है। पैन कार्ड भी इसी जन्मतिथि के हिसाब से जारी हुआ था। युवती का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव से पहले उसका पक्ष भी नहीं सुना गया।

मप्र हाई कोर्ट की युगलपीठ ने याचिका स्वीकारते हुए कहा कि बगैर किसी को सुने उसके प्रमाण पत्र में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। कोर्ट ने महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा 31 मार्च 2026 को जारी आदेश निरस्त करते हुए कहा कि युवती के पिता द्वारा जन्मतिथि में सुधार के लिए दिए गए आवेदन पर युवती को सुनवाई का अवसर देकर कानून के प्रविधानों के अनुसार नए सिरे से निर्णय लें।

जन्मतिथि विवाद के बाद पति पर एफआईआर
याचिका के अनुसार जन्मतिथि विवाद के बाद युवती के प
ति के खिलाफ महेश्वर थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई। इसमें बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और SC/ST एक्ट की धाराएं लगाए जाने की बात कही गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि बदले हुए रिकॉर्ड के आधार पर पति के खिलाफ कार्रवाई की गई और दोनों की अंतरधार्मिक शादी को लव जिहाद से जोड़कर देखा गया, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है। वहीं राज्य सरकार और युवती के पिता की ओर से इन दलीलों का विरोध किया गया और जन्मतिथि को लेकर अस्पताल के रिकॉर्ड को आधार बताया गया। 

महाकुंभ में वायरल हुआ था वीडियो
गौरतलब है कि मोनालिसा 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। मेले में रुद्राक्ष की मालाएं बेचते हुए उसका वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वह रातोंरात सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो गई थी।

मामले में युवती और उसके पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने पैरवी की। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से फिलहाल युवती को जन्मतिथि बदलने के नगर पालिका के आदेश पर राहत मिली है, जबकि जन्मतिथि का अंतिम निर्धारण अब युवती की सुनवाई के बाद होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here