
मुंबई
घरेलू शेयर बाजार में आज भारी गिरावट रही। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दिख रही है। RBI की सख्त पॉलिसी, FII की लगातार बिकवाली और दूसरी वजहों से इन्वेस्टर्स डर गए। कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 2% गिरकर अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले लेवल पर आ गया। इंडेक्स 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,179 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिरकर 71,400 के लेवल से नीचे फिसला। इस गिरावट ने BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का टोटल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 460 लाख करोड़ रुपये रह गया।
रियल्टी, एनर्जी और इंफ्रा में सबसे ज्यादा नुकसान
लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर है निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, जिसमें 2.98% की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी (-2.87%), निफ्टी इंफ्रा (-2.66%), निफ्टी पीएसई (-2.47%), निफ्टी फार्मा (-2.38%) और निफ्टी एफएमसीजी (-2.01%) 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। वहीं, भारी बिकवाली के बीच केवल निफ्टी आईटी (+0.04%) मामूली बढ़त बनाकर हरे निशान में टिकने में सफल रहा।
कौन से शेयर चमके और किसमें हुई भारी बिकवाली?
बाजार में मंदी के बावजूद केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखी गई। फोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, सबसे बड़ा नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज (-5.36%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-4.46%), आईटीसी (-4.03%), मैक्स हेल्थकेयर (-3.81%), इंडिगो (-3.55%) और श्रीराम फाइनेंस (-3.24%) में दर्ज किया गया।
गिरावट की क्या बड़ी वजह?
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। RBI ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। 30 साल की यील्ड 5.71% और 10 साल की 5.3% से ऊपर पहुंच गई। ऐसे में बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है।
सेंसेक्स 1045.46 अंक यानी 1.44% गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। आईटीसी में सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी गिरावट रही। एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 371.25 अंक यानी 1.64% फिसलकर 22,231.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले कारोबार के दौरान ITC, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% तक गिरकर सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। आज की गिरावट के मुख्य कारण:
1) RBI की सख्त पॉलिसी
RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स ने कहा कि मुश्किल ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड के बीच सेंट्रल बैंक का अपना रुख 'न्यूट्रल' से 'सख्त' में बदलने का फैसला ज्यादा जरूरी था। जेफरीज को उम्मीद है कि RBI मौजूदा साइकिल में ब्याज दरों में करीब 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। नोमुरा के मुताबिक रुख में बदलाव एक सरप्राइज़ था।
2) बॉन्ड यील्ड 24 साल के हाई पर
ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई पर पहुंच गई। अमेरिका में 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के नोट्स की यील्ड 5.3% से ऊपर है जबकि दो-साल के नोट्स की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आमतौर पर डेट मार्केट को इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इससे उभरते इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है।
3) कच्चे तेल की कीमत
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आज 2% तेजी के साथ $102 प्रति बैरल को पार कर गईं। इसकी वजह यह है कि गल्फ और होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट पर बढ़ते हमलों के बीच इन्वेस्टर्स मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंतित हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बुधवार को कहा कि कतर के उत्तर में एक टैंकर कई प्रोजेक्टाइल से टकरा गया, जिससे कई लोग मारे गए। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछले हफ्ते क्रूड का स्टॉक 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया।
4) FII की भारी बिकवाली
NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। FIIs ने बुधवार तक लगातार नौवें सेशन में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक FIIs 25 में से 20 सेशन में भारतीय इक्विटीज़ के नेट सेलर बने हुए हैं।
5) फेड रेट बढ़ने की चिंता
मिनट्स के मुताबिक पिछले महीने फेड के पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे के कारण को लेकर बंटे हुए थे। कुछ पार्टिसिपेंट्स एनर्जी और दूसरे प्राइस शॉक के असर को दूर रखने के लिए बढ़ोतरी को जरूरी मान रहे थे। वहीं कुछ इसे उभरती डिमांड से चलने वाली महंगाई से बचने के लिए जरूरी मान रहे थे। CME के फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में बढ़ोतरी की 80% संभावना मान रहे हैं।
6) कमजोर ग्लोबल संकेत
ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिल रहे हैं। साउथ कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग 1% से ज्यादा गिरे। वॉल स्ट्रीट और यूरोपियन मार्केट भी पिछले सत्र में लाल निशान पर बंद हुए जबकि डाउ जोन्स फ्यूचर्स आज अमेरिकी स्टॉक मार्केट में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं।
7) टेक्निकल लेवल टूटे
शेयर मार्केट में गिरावट बीच के कारोबारी घंटों में और तेज हो गई क्योंकि निफ्टी जरूरी सपोर्ट लेवल को तोड़ गया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट में डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर ने चेतावनी दी थी कि जब तक निफ्टी 22,800 से नीचे है, मार्केट का माहौल बहुत कमजोर बना हुआ है। इसके 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,180 के पास पहुंचने की संभावना है।


