
भोपाल
मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी आंधी और बारिश का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में लगातार सात दिनों से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, उत्तराखंड के नैनीताल में पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तमिलनाडु के कई इलाकों में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
MP के 5 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। मानसून की विदाई के बाद भी कई इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी है।मौसम विभाग ने शुक्रवार को इंदौर संभाग के पांच जिलों में अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, 24 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होगा। इसका असर 2 से 3 दिन बाद प्रदेश में दिख सकता है। फिलहाल साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण आंधी-बारिश हो रही है। गुरुवार को इंदौर, धार समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई। भोपाल में दिनभर तेज धूप रही, जबकि शाम को बादल छा गए।
प्रदेश में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे
आने वाले दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट हो सकती है। रात का पारा 2 से 3 डिग्री तक लुढ़कने का अनुमान है। बीती रात इस सीजन में पहली बार प्रदेश में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे पहुंचा।
कटनी के करौंदी में सबसे कम 13.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अमरकंटक में 14.5, रीवा में 15, उमरिया में 15.4 और शहडोल के कल्याणपुर में 15.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। इंदौर और टीकमगढ़ में पारा 34 डिग्री से नीचे आ गया।
अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बारिश और ठंड
मौसम विभाग के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी बारिश की संभावना है। नए सिस्टम का असर उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में दिख सकता है। इस दौरान रात के तापमान में भी गिरावट होगी। यानी, महीने के आखिरी सप्ताह में बारिश के साथ ठंड का असर भी बढ़ सकता है।
आलीराजपुर
बड़वानी
खरगोन
खंडवा
बुरहानपुर
इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।
प्रदेश में बारिश का सिस्टम लौटा प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है। एक ही दिन में पूरे प्रदेश से विदाई हुई, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से बारिश का दौर अभी भी चल रहा है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के जिलों में आंधी-बारिश का असर देखा गया। पिछले 7 दिन से कई जिलों में तेज बारिश भी हुई। शुक्रवार को भी बारिश का अलर्ट है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस बार प्रदेश में 100 दिन तक दक्षिण-पश्चिम मानसून एक्टिव रहा है।
इस साल सामान्य से कम हुई बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। यहां अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।
वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।
इन 25 जिलों में बारिश का कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।
वहीं 30 जिलों में कम बारिश हुई है। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
इस बार जून सूखा रहा, इस वजह से आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।
आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जुलाई, अगस्त और सितंबर का कोटा तो फुल रहा, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि इस साल प्रदेश में 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है।
भोपाल: 2012 में रिकॉर्ड 38 डिग्री रहा था तापमान भोपाल में अक्टूबर का सामान्य औसत अधिकतम तापमान 32.7 और न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस रहा है। पिछले 10 साल में तापमान 32 डिग्री के पार ही रहा। साल 2017 में 36.4 डिग्री तक पहुंच चुका है। 2012 में पारा रिकॉर्ड 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
वहीं, न्यूनतम तापमान 11.7 डिग्री 12 अक्टूबर 2012 को रहा था। इस महीने बारिश का भी ट्रेंड है। साल 1955 में पूरे महीने साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी। 6 अक्टूबर 2009 को 24 घंटे में रिकॉर्ड 5 इंच पानी गिरा था। पिछले साल पूरे महीने 3.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
नैनीताल में लैंडस्लाइड, महिला समेत 2 की मौत
उत्तराखंड के नैनीताल में देर शाम पहाड़ी से अचानक मलबा गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में एक महिला समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।हादसे के बाद प्रभावित क्षेत्र में चिंता का माहौल है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बदलते मौसम और बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।प्रशासन और राहत दलों की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराना और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में बारिश और बर्फबारी की संभावना
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में शुक्रवार को बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।बारिश और बर्फबारी के कारण पहाड़ी सड़कों पर फिसलन बढ़ने और संवेदनशील स्थानों पर मलबा गिरने का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए।
तमिलनाडु में लगातार दूसरे दिन बारिश
तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में लगातार दूसरे दिन बारिश हो रही है। उलुंदुरपेट और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का दौर जारी है।मदुरै में गुरुवार रात करीब छह घंटे तक तेज बारिश हुई, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। लगातार बारिश के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।शहरों में जलभराव से यातायात प्रभावित होने के साथ दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।


