
मैनपुरी
यूपी के मैनपुरी जिले के विभिन्न गांवों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों पर कथित अतिक्रमण और उनके संरक्षण में लापरवाही का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ तक पहुंच गया है। एनजीटी ने मामले को पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। साथ ही जिलाधिकारी मैनपुरी को सभी संबंधित जलाशयों का पुराना राजस्व रिकॉर्ड और क्षेत्रफल का ब्यौरा शपथपत्र के साथ अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
करीब 500 शब्दों के आदेश के अनुसार, यह याचिका अजय प्रताप सिंह ने दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मैनपुरी सदर और भोगांव तहसील के अनेक गांवों में राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज भूमि पर समय के साथ अतिक्रमण हो गया है और इन जलाशयों का समुचित संरक्षण नहीं किया जा रहा। याचिका में अस्योली, तालीबपुर, थोरवा, नारायणपुर, धरमंगदपुर, अठलकड़ा, आसफपुर, जैतूलपुर, ईसापुर खास, कुशलपुर, अरमसराय, अम्हेरा, अपूरपुर, अहमदपुर करूआमई, अकबरपुर विकू, आलीपुर पट्टी, आलीपुर खेड़ा, अहिरवा, औंग और अजीतगंज सहित कई गांवों के तालाबों का विवरण खाता और गाटा संख्या सहित प्रस्तुत किया गया है।
याचिका में कुछ बड़े तालाबों का विशेष उल्लेख भी किया गया है। अस्योली गांव में गाटा संख्या 452 (मि.) का क्षेत्रफल 20.1820 हेक्टेयर तथा 308 (मि.) का क्षेत्रफल 19.1940 हेक्टेयर बताया गया है। वहीं थोरवा गांव के गाटा संख्या 769 का क्षेत्रफल 9.4790 हेक्टेयर दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने अजीतगंज गांव का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि गाटा संख्या 1045, जो राजस्व अभिलेखों में 0.6110 हेक्टेयर क्षेत्रफल का तालाब दर्ज है, उस पर रागिनी कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है। इस दावे के समर्थन में कुछ जलाशयों की गूगल इमेज भी आवेदन के साथ संलग्न की गई हैं।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को
एनजीटी की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि आवेदन पर्यावरणीय मानकों के पालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है। अधिकरण ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जिलाधिकारी मैनपुरी को निर्देश दिया है कि संबंधित सभी जलाशयों का पुराना राजस्व रिकॉर्ड, उनके मूल क्षेत्रफल का विवरण तथा अभिलेखों की प्रतियां शपथपत्र के साथ अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।
20 से अधिक गांवों के तालाब जांच के दायरे में
याचिका में सदर और भोगांव तहसील के 20 से अधिक गांवों के तालाबों का उल्लेख किया गया है। इसमें खाता और गाटा संख्या के साथ विस्तृत विवरण शामिल है।
कोल्ड स्टोरेज पर अतिक्रमण का आरोप
डीएम मैनपुरी डा. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि याचिका के अनुसार अजीतगंज के गाटा संख्या 1045 को तालाब बताया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसी भूमि पर रागिनी कोल्ड स्टोरेज बना है। मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है। लेकिन इस संबंध में कोई पत्र उन्हें नहीं मिला है। जैसे ही पत्र मिलेगा आवश्यक डाटा एकत्रित कराकर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। मैनपुरी में सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा हटाने का साप्ताहिक अभियान चल रहा है। तालाब, चक रोड तथा अन्य सरकारी जमीनों पर जो भी कब्जे हैं वह हटाए जा रहे हैं।
डीएम को एनजीटी का निर्देश
एनजीटी ने डीएम को निर्देश दिए हैं कि इसके लिए पुराने राजस्व अभिलेख पेश किए जाएं। जलाशयों का मूल क्षेत्रफल बताते हुए शपथपत्र के साथ रिपोर्ट दाखिल की जाए।


